जून 2026 से टेलीकॉम सेक्टर में टैरिफ बढ़ोतरी के आसार
देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए आने वाले कुछ महीने आर्थिक बोझ बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां—रिलायंस जियो (Reliance Jio), भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन-आइडिया (Vi)—जून 2026 से अपने मोबाइल टैरिफ दरों में भारी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही हैं। अनुमान है कि यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत तक हो सकती है, जिससे प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के प्लान महंगे हो जाएंगे।
आखिर क्यों बढ़ रही हैं रिचार्ज की कीमतें?
टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा इस संभावित मूल्य वृद्धि के पीछे कई रणनीतिक और वित्तीय कारण बताए जा रहे हैं:
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ARPU (प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व) में सुधार: कंपनियां अपनी प्रति उपयोगकर्ता औसत कमाई यानी ARPU को ₹200 से ₹250 के स्तर तक ले जाना चाहती हैं ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
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5G इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च: देश भर में 5G सेवाओं के विस्तार के लिए कंपनियों ने भारी निवेश किया है। इस निवेश की वसूली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता है।
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स्पेक्ट्रम भुगतान: सरकार को किए जाने वाले स्पेक्ट्रम बकाया और अन्य नियामक शुल्कों के भुगतान के दबाव के कारण भी कंपनियां टैरिफ बढ़ा सकती हैं।
आम आदमी की जेब पर कितना पड़ेगा असर?
अगर दरों में 15% की वृद्धि होती है, तो वर्तमान में प्रचलित प्लान्स की कीमतों में सीधा बदलाव देखा जाएगा। उदाहरण के लिए:
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यदि आप वर्तमान में ₹299 वाला प्लान इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसके लिए आपको लगभग ₹345 चुकाने पड़ सकते हैं।
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इसी तरह, लंबी अवधि के और महंगे प्लान्स पर यह बोझ और भी अधिक होगा। मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
कंपनियों की रणनीति और भविष्य का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां इस बढ़ोतरी को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकती हैं ताकि ग्राहकों पर अचानक बहुत अधिक बोझ न पड़े। हालांकि, 5G डेटा के बढ़ते उपयोग और प्रीमियम सेवाओं के विस्तार को देखते हुए, टेलीकॉम क्षेत्र में यह मूल्य वृद्धि अपरिहार्य मानी जा रही है। एयरटेल के प्रबंधन ने पहले ही संकेत दिया था कि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए टैरिफ में सुधार जरूरी है।