उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4.6°C, तमिलनाडु में भारी बारिश
उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4.6°C, तमिलनाडु में भारी बारिश
Read More
खेती से होगी नोटों की बारिश: जनवरी-फरवरी में लगाएं ये 5 सब्जियां, एक एकड़ में
खेती से होगी नोटों की बारिश: जनवरी-फरवरी में लगाएं ये 5 सब्जियां, एक एकड़ में
Read More
मकर संक्रांति 2026: 100 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग, ‘सर्वार्थ सिद्धि’ और ‘अमृत
मकर संक्रांति 2026: 100 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग, ‘सर्वार्थ सिद्धि’ और ‘अमृत
Read More
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का कहर: दिल्ली, यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का कहर: दिल्ली, यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों
Read More
देश का मौसम: दक्षिण भारत में मूसलाधार बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’, उत्तर भारत में कड़ाके
देश का मौसम: दक्षिण भारत में मूसलाधार बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’, उत्तर भारत में कड़ाके
Read More

सोयाबीन बाजार विश्लेषण: क्या जनवरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य के स्तर को पार करेंगे दाम?

बाजार की वर्तमान स्थिति और कीमतों में सुधार का सिलसिला

पिछले दो सप्ताह के दौरान देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में कीमतों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वर्तमान समय में सोयाबीन के दाम धीरे-धीरे सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के करीब पहुंच रहे हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न प्रसंस्करण संयंत्रों (Processing Plants) में सोयाबीन की खरीद दर इक्यावन सौ से बावन सौ रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की जा रही है। हालांकि, स्थानीय कृषि मंडियों में किसानों को मिलने वाला वास्तविक भाव अब भी समर्थन मूल्य से थोड़ा पीछे है। मंडियों में अधिकतर सोयाबीन छियालीस सौ से अड़तालीस सौ रुपये के दायरे में बिक रहा है, जिसका सीधा अर्थ है कि प्लांट और मंडी के भाव में अभी भी तीन सौ से चार सौ रुपये का अंतर बना हुआ है।

ADS कीमत देखें ×

कीमतों में मजबूती आने के पीछे के मुख्य कारण

सोयाबीन के बाजार में आई इस हालिया तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण उत्तरदायी हैं। इस वर्ष देश में सोयाबीन का कुल उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम रहने का अनुमान लगाया गया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन एक सौ पांच से एक सौ दस लाख टन के आसपास रह सकता है, जबकि बाजार में चर्चा है कि वास्तविक उत्पादन इससे भी कम हो सकता है। इसके अलावा, पिछले साल का बचा हुआ स्टॉक यानी कैरी फॉरवर्ड स्टॉक भी इस बार नाममात्र का ही था। साथ ही, घरेलू स्तर पर सोयाबीन के तेल और सोया खली (DOC) की मांग में मजबूती देखी जा रही है और यूरोपीय देशों सहित पड़ोसी देशों में निर्यात की स्थिति भी संतोषजनक बनी हुई है।

Leave a Comment