अल नीनो की आहट और सूखे की आशंका
मौसम विश्लेषक किरण वाघमोडे के अनुसार, साल 2026 के मानसून पर ‘अल नीनो’ (El Niño) का गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर 1972 जैसे भीषण सूखे की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, वाघमोडे का कहना है कि 1972 की तुलना में आज भारत में सिंचाई की बेहतर सुविधाएं और अन्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए वैसी विकट स्थिति होने की संभावना कम है। लेकिन वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि जब भी अल नीनो सक्रिय होता है, तो 84% मामलों में मानसून कमजोर रहता है और केवल 16% मामलों में ही सामान्य बारिश होती है।
ला नीना का अंत और समुद्री तापमान में बदलाव
वर्तमान में प्रशांत महासागर में ‘ला नीना’ (La Niña) की स्थिति बनी हुई है, जो अच्छी बारिश के लिए जानी जाती है। परंतु, जनवरी के अंत तक ला नीना का प्रभाव समाप्त होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के विभिन्न मॉडल्स (जैसे ECMWF और अमेरिकी मॉडल) संकेत दे रहे हैं कि मई और जून 2026 के दौरान प्रशांत महासागर के ‘नीनो 3.4’ रीजन में पानी का तापमान बढ़ेगा और पश्चिमी हवाएं तेज होंगी। यह स्थिति अल नीनो के विकसित होने के लिए अनुकूल है। अनुमान है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो आने की संभावना 50% से 61% तक बढ़ सकती है।












