बंगाल की खाड़ी में ‘डीप डिप्रेशन’ और दक्षिण भारत में भारी बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना ‘डीप डिप्रेशन’ अब भारत के तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। यह सिस्टम श्रीलंका के हंबनटोटा के पास से गुजरते हुए जाफना और आसपास के इलाकों में अति भारी बारिश का कारण बनेगा। इसके प्रभाव से अगले दो से तीन दिनों के दौरान दक्षिणी तमिलनाडु के जिलों, विशेष रूप से रामनाथपुरम, तिरुकोट, शिवगंगा और नागपट्टिनम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। साथ ही, पुडुचेरी और आसपास के तटीय इलाकों में भी मौसम खराब रहेगा।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में हल्की बूंदाबांदी के आसार
दक्षिण भारत के सिस्टम का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। १० जनवरी की शाम से ११ जनवरी के बीच महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, सांगली, सतारा, कोल्हापुर और रत्नागिरी में कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है। इसी तरह, कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों, गोवा और रायलसीमा के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, १२ जनवरी से इन क्षेत्रों में मौसम फिर से साफ होने की उम्मीद है।
उत्तर भारत में बर्फीली हवाओं और कोहरे का सितम
उत्तर भारत के मैदानी राज्यों—पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार—में फिलहाल ठंड से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं हैं। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण इन राज्यों में ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की स्थिति बनी हुई है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे, १० से १५ डिग्री के बीच बना हुआ है। हालांकि, कोहरे की तीव्रता में थोड़ी कमी आ सकती है और दिन में हल्की धूप निकलने की संभावना है, लेकिन सर्द हवाएं कड़ाके की ठंड का एहसास कराती रहेंगी।
पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति और पहाड़ों पर सूखा
एक चिंताजनक खबर यह है कि उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—में अगले एक सप्ताह तक किसी बड़े ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) के आने की संभावना नहीं है। इसके चलते कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक पहाड़ों पर बर्फबारी का इंतजार बढ़ गया है। शिमला, कुल्लू और मनाली जैसे पर्यटन स्थल फिलहाल सूखे बने हुए हैं और वहां केवल ऊंचे पहाड़ों पर ही हल्की बर्फ देखने को मिल रही है। पहाड़ों पर बर्फबारी न होने के कारण मैदानी इलाकों में भी शुष्क ठंड बनी रहेगी।
मध्य और पूर्वी भारत की स्थिति
राजस्थान के जैसलमेर के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना है, लेकिन नमी की कमी के कारण यहां बारिश की कोई संभावना नहीं है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में एक-दो डिग्री की गिरावट आ सकती है, जिससे रात की सर्दी बढ़ेगी। पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी अगले एक सप्ताह तक मौसम शुष्क रहेगा और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा।